चांडिल गोलचक्कर
चांडिल :- चांडिल डेम स्वर्णरेखा परियोजना के विस्थापितों को उनका हक और अधिकार दिलाने के लिए झारखंड श्रमिक संघ के केंद्रीय महासचिव सह झामुमो नेता शैलेंद्र कुमार मैथी ने चांडिल गोलचक्कर स्थित सिद्धू-कान्हू प्रतिमा के समक्ष संकल्प लेते हुए कहा कि विस्थापितों के हक के लिए एक बार फिर से उलगुलान करने की जरूरत है। प्रेस को संबोधित करते हुए शैलेंद्र मेथी ने कहा है कि विस्थापितों की मुआवजा राशि विस्थापितों द्वारा और बिचौलियों द्वारा हड़पने तथा खुदकट्टी जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने के खिलाफ सरायकेला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन के द्वारा सरायकेला उपायुक्त को बताया गया है कि बैंक और बिचौलिए मिलकर विस्थापितों की मुआवजा राशि हड़प रहे है वही विस्थापितों की विकास पुस्तिका सहित कई अन्य जरूरी कागजात आज भी बिचौलियों के हाथों में बंधक है। ऐसे बिचौलियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। दूसरी तरफ एक अन्य ज्ञापन सौंपते हुए उपायुक्त से बताया कि नदिसाई पंचायत के घाघरी में फर्जी दस्तावेज बनाकर 1.76 एकड़ मुंडारी खूंटकट्टी जमीन को हड़पा जा रहा है जिसकी सूचना विगत दिनों चांडिल के एसडीओ और इचागढ़ के सीईओ को दी गई थी जिसपर जांच तो हुई मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ज्ञात हो कि सरायकेला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर शैलेन्द्र मेथी विस्थापितों के साथ चांडिल गोलचक्कर पहुंचे थे जहां मीडिया से मुखातिब होते हुए मैथी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बदनाम करने की एक साजिश चल रही है विस्थापितों के हक दिलाने व पूर्व सरकार के नेता व मुख्यमंत्री ने विस्थापितों को आश्वासन दिया लेकिन न्याय नहीं मिला उल्टा दलाल हावी हुए और अपने पास विस्थापितों के सेवा पुस्तिका, पासबुक, आधार कार्ड आदि मुख्य कागजात अपने पास आज भी रखे हुए हैं इस तरह विस्थापितों के हक और अधिकार को लूटा जा रहा है वही विस्थापितों की समस्याओं के समाधान में दलाल और बिचौलिए बाधक बने हुए हैं जिसकी जांच होनी चाहिए और रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए वही चिन्हित किए हुए दलालों पर मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजने का काम प्रशासन करें नहीं तो आने वाले दिनों में आंदोलन का रूप ले लेगी। इस मौके पर JSS के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रफुल्ल सिंह मुंडा, रिजु मांझी, सोनू बागची, वकील सिंह मुंडा, रवि मांझी और गौर चंद्र हांसदा आदि उपस्थित थे।
चांडिल से भास्कर मिश्रा की रिपोर्ट।

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